रचनाएँ
करवटें
यूँ ही करवटें बदलता रहता हूँ.मैं नींद में भी चलता रहता हूँ.. जब भी तुम चाँद बनकर निकलती हो.मैं सूरज...
पूरा पढ़ेंमुक़द्दर को ढूंढता
औरों की ही तरह, मुक़द्दर को ढूंढता.आया तेरे शहर मैं, तेरे घर को ढूंढता. वो,जान भी दिया तो महज़ बूँद...
पूरा पढ़ेंचल रही सदियों से जो, वो बात होनी चाहिए
चल रही सदियों से जो, वो बात होनी चाहिए. अबकी सावन में भी इक, बरसात होनी चाहिए. सोच लो कि...
पूरा पढ़ेंअंधेरे कूप के अंदर, करे संसार की बातें
अंधेरे कूप के अंदर, करे संसार की बातें. कभी अधिकार की बातें,कभी सरकार की बातें. किनारे पर खड़े होकर,तुम अच्छी...
पूरा पढ़ेंहै पुकारा आज अपने देश ने संतान को
है पुकारा आज अपने देश ने संतान को. जान देने का सही अब वक़्त शायद आ गया. सैकड़ों रंगों से...
पूरा पढ़ेंज़िल्द
मैं एक ज़िल्द हूँ. मेरी फ़ितरत है,किताबों की रक्षा करना, मेरा फ़र्ज़ है उसकी सुरक्षा करना. मुझे अच्छा लगता है,सुकून...
पूरा पढ़ेंजहाँ हीरा भी बिकना चाहे,ऐसा बाज़ार बन
खुद की ही बात सुन, खुद की सरकार बन. जहाँ हीरा भी बिकना चाहे,ऐसा बाज़ार बन. दुश्मनों से नज़रें मिलाकर...
पूरा पढ़ेंबहुत याद आती है बातें पुरानी.
बहुत याद आती है बातें पुरानी. भूले ना भूलूँ वो बचपन की बातें.वो तपती दुपहरी, वो खामोश रातें.पड़ी है अभी...
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